सरदारशहर का नाम 1838 में बीकानेर के महाराजा रतन सिंह के पुत्र सरदार सिंह के नाम पर रखा गया, और यह थार के किनारे एक समृद्ध व्यापारिक शहर बना। व्यापारियों की हवेलियाँ, मशहूर संगमरमर का घंटाघर और मंदिरों से भरा शहर आज भी देखने लायक है। यह सूची शहर में एक दिन या आराम वाले वीकेंड के लिए है।
1. इच्छापूर्ण बालाजी मंदिर
सरदारशहर का सबसे प्रसिद्ध मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है और दक्षिण भारतीय द्रविड़ शैली में बना है, जो इस इलाक़े में कम दिखती है। इसका उद्घाटन 2005 में हुआ, और यह आमतौर पर सुबह लगभग 6 से रात 9 बजे तक खुला रहता है। मंगलवार, शनिवार और हनुमान जयंती पर सबसे ज़्यादा भीड़ रहती है।

2. घंटाघर — संगमरमर की घड़ी मीनार
सफ़ेद संगमरमर का घंटाघर लगभग 60 फ़ुट ऊँचा है, और इसके नीचे से चारों दिशाओं में सड़कें निकलती हैं। स्थानीय लोग गर्व से इसे अनोखा बताते हैं। शाम को जाएँ, जब आसपास का बाज़ार सबसे ज़्यादा चहल-पहल में होता है।
3. व्यापारियों की हवेलियाँ
पास के शेखावाटी क़स्बों की तरह सरदारशहर में भी व्यापारी घरानों की भव्य हवेलियाँ हैं। जिनका अक्सर ज़िक्र होता है:
- जम्मर हवेली (1873), जो पाबूजी की कथा वाली चित्र-पट्टी समेत भित्तिचित्रों और सुनहरे रंग वाले कमरों के लिए जानी जाती है।
- बुद्धमल दूगड़ हवेली, जिसमें झाड़-फ़ानूस वाला संगीत कक्ष और काँच-सोने का काम है।
- रामलाल अनूपचंद दूगड़ हवेली, जिसमें पुस्तकालय और क़ालीन जैसी चित्रकारी वाली छतें हैं।
- चौधरी, नाहटा, मालू और गधैया परिवारों की हवेलियाँ।
4. शांति पीठ
इच्छापूर्ण बालाजी वाले हाईवे पर ही शांति पीठ है, एक शांत जैन स्थल जहाँ आचार्य महाप्रज्ञ की समाधि है। सरदारशहर जैन तेरापंथ के 11वें आचार्य, आचार्य महाश्रमण की जन्मभूमि भी है, इसलिए यह शहर जैन श्रद्धालुओं के लिए ख़ास है।
5. रानी सती मंदिर और पुराने शहर के मंदिर
ताल मैदान का रानी सती मंदिर 18वीं सदी का है और विशेष दिनों पर यहाँ बड़ी भीड़ होती है। पुराने शहर में शनि मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, नाथ जी मंदिर और सच्चियाय माता मंदिर भी हैं। सर्दियों की सुबह इन्हें पैदल घूमना आसान है।
6. चाँदी, हस्तशिल्प और मिठाइयाँ
सरदारशहर चाँदी के काम के लिए जाना जाता है: स्थानीय कारीगरों के बनाए गहने, बर्तन और सजावटी सामान। पुराने बाज़ारों में लकड़ी का काम और हस्तशिल्प भी मिलते हैं। शहर की मिठाई की दुकानों की स्थानीय मिठाइयाँ ज़रूर चखें।

7. गांधी विद्या मंदिर
इस बड़े शिक्षा परिसर की नींव 1955 में भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने रखी थी, और यह शहर की आधुनिक कहानी का हिस्सा है। आज यहाँ किंडरगार्टन से पीएचडी तक 10,000 से ज़्यादा विद्यार्थी पढ़ते हैं।
8. एक दिन की यात्राएँ
- ताल छापर काला हिरण अभयारण्य, लगभग 89 किमी (लगभग डेढ़ घंटा): काले हिरणों के झुंड, और सितंबर से मार्च तक प्रवासी शिकारी पक्षी।
- सालासर बालाजी, SH-7 पर दक्षिण में लगभग 73 किमी (लगभग सवा घंटा): राजस्थान के सबसे ज़्यादा देखे जाने वाले हनुमान मंदिरों में से एक।
9. रूफ़टॉप से सूर्यास्त
दिन का अंत रेगिस्तान पर ढलते सूरज को देखते हुए करें। जय महल होटल एंड रिसॉर्ट में खुले आसमान वाली रूफ़टॉप सीटिंग है, जहाँ से दूर तक का नज़ारा दिखता है, और बाद में खाने के लिए AC रेस्टोरेंट है।
दूरी, सफ़र का समय और मंदिर आदि के समय अनुमानित हैं और बदल सकते हैं। यात्रा से पहले जाँच लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सरदारशहर किस लिए प्रसिद्ध है?
व्यापारियों की हवेलियों, सफ़ेद संगमरमर के घंटाघर, इच्छापूर्ण बालाजी मंदिर, जैन विरासत (शांति पीठ, और आचार्य महाश्रमण की जन्मभूमि), चाँदी के काम और मिठाइयों के लिए।
सरदारशहर घूमने के लिए कितना समय चाहिए?
एक पूरे दिन में मंदिर, घंटाघर और पुरानी हवेलियाँ (बाहर से) देखी जा सकती हैं। ताल छापर या सालासर जाना हो तो एक दिन और रखें।
क्या हवेलियों के अंदर जा सकते हैं?
ज़्यादातर हवेलियाँ निजी घर हैं। सड़क से देखें, और अंदर जाने से पहले मालिकों से विनम्रता से पूछें।
सरदारशहर में कहाँ ठहरें?
जय महल होटल एंड रिसॉर्ट गंगानगर–जयपुर हाईवे पर, इच्छापूर्ण बालाजी मंदिर से 400 मीटर दूर है। यहाँ कमरे, AC रेस्टोरेंट, रूफ़टॉप सीटिंग और पार्किंग है। कॉल करें +91 78919 99993।
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